Barsaat Sawan Ki Shayari – Tumhare Muntazir Rehte Hai Sawan Ke Haseen Jhule

तुम्हारे मुंतज़िर रहते हैं सावन के हसीं झूले
किया करती है याद अक्सर तुम्हें बरसात सावन की – राजेन्द्र नाथ रहबर





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