December Shayari | Winter Shayari In Hindi | Sardi Par Shayari

इरादा था जी लूँगा तुझ से बिछड़ कर
गुज़रता नहीं इक दिसम्बर अकेले
December Shayari – Irada Tha Jee Lunga Tujh Se Bichhad Kar

December Shayari – Missing You

इरादा था जी लूँगा तुझ से बिछड़ कर
गुज़रता नहीं इक दिसम्बर अकेले

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

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सर्द ठिठुरी हुई लिपटी हुई सरसर की तरह
ज़िंदगी मुझ से मिली पिछले दिसम्बर की तरह

मंसूर आफ़ाक़

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ग़ुज़र जाता है सारा साल यूँ तो
नहीं कटता मगर तन्हा दिसम्बर
जमा पूंजी यही है उम्र भर की
मेरी तन्हाई और मेरा दिसम्बर

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धड़कता तो है मुस्कुराता नहीं
दिसम्बर मुझे रास आता नहीं
December Shayari – Dadhakta To Hai Muskurata Nahi

Sad December Shayari

धड़कता तो है मुस्कुराता नहीं
दिसम्बर मुझे रास आता नहीं

मोहसिन नक़वी

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हर दिसम्बर इसी वहशत में गुज़ारा कि कहीं
फिर से आँखों में तिरे ख़्वाब न आने लग जाएँ

रेहाना रूही

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तेरी याद भी इस दिसम्बर में,
गुनगुनी धुप सा मजा देती है ।

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पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था 
महके हुए दिन-रात थे मेरे और दिसम्बर था 
चाँदनी-रात थी सर्द हवा से खिड़की बजती थी 
उन हाथों में हाथ थे मेरे और दिसम्बर था
फ़रह शाहिद
December Shayari – Peechhle Baras Tum Saath The

Miss You December Shayari

पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था
महके हुए दिन-रात थे मेरे और दिसम्बर था
चाँदनी-रात थी सर्द हवा से खिड़की बजती थी
उन हाथों में हाथ थे मेरे और दिसम्बर था
फ़रह शाहिद

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मैं कैसै सर्द हाथों से तुम्हारे गाल छूता था ..
दिसम्बर में तुम्हें मेरी शरारत याद आयेगी ..

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ये सर्द हवाएं मुझसे कहती है कि दिसम्बर आ गया है.
मुझे उन बाहों की गर्माहट का इंतज़ार आज भी है…

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दिसम्बर की शब-ए-आख़िर न पूछो किस तरह गुज़री
यही लगता था हर दम वो हमें कुछ फूल भेजेगा
December Shayari – December Ki Shab-e-Akhiri Na Puchho Kis Tarah Gujri

दिसम्बर की शब-ए-आख़िर न पूछो किस तरह गुज़री
यही लगता था हर दम वो हमें कुछ फूल भेजेगा

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काश कोई अपना संभाल ले मुझको,
बहुत कम बचा हूँ बिल्कुल दिसम्बर की तरह।

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ये कैसा ख्याल है तेरा, जो मेरा हाल बदल देता है
तू दिसम्बर की तरह है, जो पूरा साल बदल देता है..!

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ये सर्द हवाएँ,बिखरे पत्ते और तन्हाई,
ऐ दिसम्बर तू सब कुछ ले आया है सिवाय उसके
December Shayari – Ye Sard Hawayen Ye Bikhare Patte Aur Tanhai


ये सर्द हवाएँ,बिखरे पत्ते और तन्हाई,
ऐ दिसम्बर तू सब कुछ ले आया है सिवाय उसके

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तुम्हारे बाद ग़ुज़रे हैं भला कैसे हमारे दिन
नवम्बर से बचे हैं तो दिसम्बर ने मार डाला!!!

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दिसम्बर क्या आया, रह गये दोनो अकेले,
एक मैं…. दुसरा वो कैलेण्डर का पेज आखरी

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दिसम्बर से कौन डरता है…..
सर्द लहज़ो से जान जाती हैं…!!!

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Romantic Shayari – December Shayari When Missing Someone

फिर से तेरी यादों का दिल के दरवाजे पर मंजर हैं…
वही मौसम वही सर्दी…वही दिलकश दिसम्बर है