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फितरत शायरी हिंदी में – आग लगाना मेरी फितरत में

आग लगाना मेरी फितरत में नही है
मेरी सादगी से लोग जलें तो मेरा क्या

फितरत शायरी हिंदी में – उनकी फितरत परिंदों सी थी

उनकी फितरत परिंदों सी थी,
मेरा मिज़ाज दरख़्तों जैसा,
उन्हें उड़ जाना था,
और मुझे कायम ही रहना था !!

फितरत शायरी हिंदी में – ऐसा नही कि मेरे इन्तजार

ऐसा नही कि, मेरे इन्तजार की…उन्हें खबर नही,
लेकिन….
तड़पाने की आदत तो….उनकी फितरत में शुमार है…..!!

फितरत शायरी हिंदी में – मेरी फितरत में नहीं हैं

मेरी फितरत में नहीं हैं किसी से नाराज होना,
नाराज वो होतें हैं जिन्हें अपनेआप पर गुरूर होता है।।

फितरत शायरी हिंदी में – सिखा दिया ‘तुने’ मुझे… अपनों

सिखा दिया ‘तुने’ मुझे… अपनों पर भी ‘शक’ करना…
मेरी ‘फितरत’ में तो था… गैरों पर भी ‘भरोसा’ करना….