क़यामत शायरी हिंदी में – सँभलने दे मुझे ऐ ना-उम्मीदी

सँभलने दे मुझे ऐ ना-उम्मीदी क्या क़यामत है
कि दामान-ए-ख़याल-ए-यार छूटा जाए है मुझ से!



क़यामत शायरी हिंदी में – दिल में समां गयीं हैं

दिल में समां गयीं हैं क़यामत की शोख़ियाँ
दो-चार दिन मैं भी रहा था मैं किसी की निगाह में



क़यामत शायरी हिंदी में – मोहब्बत ये नहीं कि तुम

मोहब्बत ये नहीं कि तुम तड़पो और उसे खबर भी न हो
मोहब्बत ये है की तुम्हारा दिल तड़पे तो उसके दिल पे क़यामत गुज़रे…

क़यामत शायरी हिंदी में – क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने

क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने जब माँगा उससे ज़िन्दगी का हिसाब;
ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला, जाने दो, ‘मोहब्बत’ की है इसने।