बोसा शायरी हिंदी में – दिखा के जुम्बिश-ए-लब ही तमाम

दिखा के जुम्बिश-ए-लब ही तमाम कर हम को
न दे जो बोसा तो मुँह से कहीं जवाब तो दे


बोसा शायरी हिंदी में – बोसा जो रुख़ का देते

बोसा जो रुख़ का देते नहीं लब का दीजिए
ये है मसल कि फूल नहीं पंखुड़ी सही