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मुलाक़ात शायरी हिंदी में – छू जाती है तुम्हारी बातेकितनी

छू जाती है तुम्हारी बाते,कितनी दफ़े यूँ ही ख़्वाब बन के,
कौन कहता है कि दूर रह कर मुलाक़ात नहीं होती।

मुलाक़ात शायरी हिंदी में – तू दिल पे बोझ लेके

तू दिल पे बोझ लेके, मुलाक़ात को न आ
मिलना है इस तरह, तो बिछड़ना क़ुबूल है

मुलाक़ात शायरी हिंदी में – लग जा गले कि फिर

लग जा गले कि फिर
ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में
मुलाक़ात हो न हो