वजूद शायरी हिंदी में – वजूद की तलब ना कर…!

वजूद की तलब ना कर…!
हक है तेरा रूह तक, सफर तो कर…!!


वजूद शायरी हिंदी में – मिरे महबूब इतराते फिरते थे

मिरे महबूब इतराते फिरते थे जवानी पे अपनी ।
मिरे बिना अपना वजूद जो देखा तो रूह कांप गई ।।


वजूद शायरी हिंदी में – अपने वजूद का अंदाजा इसी

अपने वजूद का अंदाजा इसी से लगा…
तू सांस है मेरी वो भी ‘रूकी’ हुई..